एप्लास्टिक एनीमिया एवं हायपोप्लास्टिक मैरो पर डॉ. ए.के. द्विवेदी का प्रभावशाली वैज्ञानिक व्याख्यान

एचएमएआई स्वर्ण जयंती सम्मेलन के दूसरे दिन इंदौर के वरिष्ठ एवं ख्यातिप्राप्त होम्योपैथिक चिकित्सक, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (फिज़ियोलॉजी एवं बायोकेमिस्ट्री), एसकेआरपी गुजराती होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, इंदौर — डॉ. ए.के. द्विवेदी ने “एप्लास्टिक एनीमिया : रोग की पैथोफिज़ियोलॉजी एवं होम्योपैथिक दृष्टिकोण” विषय पर हॉल नंबर–6 में अत्यंत प्रभावशाली एवं वैज्ञानिक व्याख्यान प्रस्तुत किया।

डॉ. द्विवेदी ने एप्लास्टिक एनीमिया एवं हायपोप्लास्टिक बोन मैरो डिसऑर्डर की रोग-प्रक्रिया (पैथोफिज़ियोलॉजी), उनके होम्योपैथिक प्रबंधन, दीर्घकालीन नैदानिक अनुभव तथा शोध आधारित निष्कर्षों को सरल, व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि होम्योपैथिक औषधियों के साथ गुड़-चना, गुड़-बादाम के लड्डू तथा गुड़-अलसी के लड्डू पोषण की दृष्टि से अत्यंत सहयोगी सिद्ध होते हैं। अत्यधिक गंभीर रोगियों में प्रारंभिक चरण में कुछ समय के लिए ब्लड पीआरपी, एसडीपी एवं पैक्ड सेल्स की आवश्यकता पड़ सकती है, जिन्हें रोगी की स्थिति स्थिर होने पर क्रमशः बंद कर दिया जाता है।

अपने व्याख्यान के दौरान डॉ. द्विवेदी ने ऐसे रोगियों के प्रामाणिक केस भी प्रस्तुत किए जो वर्षों से एप्लास्टिक एनीमिया से पूर्णतः मुक्त हैं और वर्तमान में उन्हें किसी भी प्रकार की होम्योपैथिक दवा की आवश्यकता नहीं है। उनके इस शोधपरक, अनुभवजन्य एवं प्रेरणादायी योगदान के लिए उन्हें मोमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सत्र चिकित्सकों, शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध हुआ तथा भारतीय होम्योपैथी की वैज्ञानिक क्षमता को राष्ट्रीय मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करने वाला रहा।

एचएमएआई स्वर्ण जयंती सम्मेलन : दूसरा दिन — ज्ञान, नीति और शोध का सशक्त संगम

कोलकाता में आयोजित होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एचएमएआई) के स्वर्ण जयंती सम्मेलन का दूसरा दिन शैक्षणिक, नीतिगत एवं वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक रहा। इस अवसर पर नेशनल होम्योपैथी कमीशन (एनसीएच) के माननीय चेयरमैन डॉ. तारकेश्वर जैन ने होम्योपैथी शिक्षा में प्रस्तावित नेट परीक्षा, एग्ज़िट टेस्ट तथा भविष्य में डीएम जैसे उच्च स्तरीय पाठ्यक्रमों की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने इन पहलों को देश में होम्योपैथी शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं समानता सुनिश्चित करने की दिशा में निर्णायक कदम बताया।

इसी सत्र में यह संदेश भी सशक्त रूप से उभरकर सामने आया कि होम्योपैथी उन जटिल एवं असाध्य मानी जाने वाली बीमारियों में भी आशा की किरण बनकर उभर रही है, जिनमें प्रमुख रूप से एप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी शामिल है। सम्मेलन का यह दिन होम्योपैथी के उज्ज्वल भविष्य, शैक्षणिक सुधार एवं वैज्ञानिक सशक्तता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ

Leave a Comment